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रोशनी की रेखा — Mohsen Moussawi

रोशनी की रेखा

गीत

रोशनी की रेखा

Mohsen Moussawi

रोशनी की रेखा एल्बम से

MIBL Radio पर Mohsen Moussawi का “रोशनी की रेखा” सुनिए — मुफ़्त, बिना ऐप, तुरंत चालू।

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दुनिया तूफ़ान बन गई — और नारा है: आज़ादी

यह हमारा ईरान ज़िंदा है, नूर से और आबादी से

हम नूर की नस्ल से हैं, हम सूरज की औलाद हैं

इस क़ौम के अज़्म से हमने कल को अभी देख लिया

रात की पीठ काँप उठी शेरों की दहाड़ से

"जावीद" नारा बना, इस ईरान की छतों पर

न शेख़ न मुल्ला, न ज़ुल्म न सितम

हमारा नारा बस यही: ईरान आज़ाद हो!

उठ ऐ हमवतन, क़याम का वक़्त आ गया

बेगाने का ज़माना आख़िरकार ख़त्म हुआ

दुनिया से ईरान तक नूर की एक ही लकीर

आज़ादी नज़दीक है — रास्ता दूर नहीं

हुक्म हम तक पहुँचा: हमें एक होना है

इस क़फ़स की ज़ंजीरों से हमें छूटना है

शहज़ादे ने नाम दिया, रिहाई की उस राह को

और अपनी एकता से हम वतन वापस लेंगे

पाक ख़ून की क़सम, इस मिट्टी की क़सम

जहालत और ज़ोर की दीवार ज़मीन पर गिरती है

यह हमारा ईरान ज़िंदा है, हमारी रगों के ख़ून से

अपना घर वापस लेंगे चोरों के पंजों से

उठ ऐ हमवतन, क़याम का वक़्त आ गया

बेगाने का ज़माना आख़िरकार ख़त्म हुआ

दुनिया से ईरान तक नूर की एक ही लकीर

आज़ादी नज़दीक है — रास्ता दूर नहीं

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