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फ़ारस की खाड़ी — Mohsen Moussawi

फ़ारस की खाड़ी

गीत

फ़ारस की खाड़ी

Mohsen Moussawi

फ़ारस की खाड़ी एल्बम से

MIBL Radio पर Mohsen Moussawi का “फ़ारस की खाड़ी” सुनिए — मुफ़्त, बिना ऐप, तुरंत चालू।

टेम्पो
91 BPM
की
F minor 81% भरोसा
Camelot
4A

इसे 46 या 182 BPM भी पढ़ा जा सकता है — टेम्पो का दोगुना होना सामान्य है और दोनों सही हैं।

बोल

ऐ फ़ारस की खाड़ी, ऐ पारसियों के समंदर,

तेरा नाम हर ईरानी के दिल पर खुदा हुआ है।

बहुत पुराने ज़माने से तारीख़ तेरी गवाह रही,

हर किताब में तेरा नाम हमेशा फ़ारस की खाड़ी रहा।

तेरा नाम, फ़ारस — हमेशा ऐसा ही रहे

और हर दुश्मन अपने ही ग़ुस्से से अंधा हो कर गिर पड़े

पुराने नक़्शों से आज के दस्तावेज़ों तक,

तेरा नाम सोने के ताज की तरह चमकता है।

तेरी हर लहर ईरान की शान का एक तराना,

तेरा हर साहिल शेरदिल मर्दों की एक यादगार।

तेरा नाम, फ़ारस — हमेशा ऐसा ही रहे

और हर दुश्मन अपने ही ग़ुस्से से अंधा हो कर गिर पड़े

यह नाम हमारे बुज़ुर्गों की विरासत है, कल से चली आई,

यह नाम आज हम जो हैं उसका पासबान है।

जो कोई तेरे नाम को कोई और नाम बनाना चाहे

वह तारीख़ को अनदेखा करता है, और अपनी जहालत खोल देता है।

तेरा नाम, फ़ारस — हमेशा ऐसा ही रहे

और हर दुश्मन अपने ही ग़ुस्से से अंधा हो कर गिर पड़े

ऐ फ़ारस की खाड़ी, ऐ अनछुई तहज़ीब के गहवारे,

तेरा नाम इस मिट्टी के सीने पर जावेदाँ है।

हमेशा फ़ारस रह, हमेशा सर उठाए रह,

क्योंकि तेरा नाम हमारी सरज़मीन की शान का निशान है।

तेरा नाम, फ़ारस — हमेशा ऐसा ही रहे

और हर दुश्मन अपने ही ग़ुस्से से अंधा हो कर गिर पड़े

तेरा नाम, फ़ारस — हमेशा ऐसा ही रहे

और हर दुश्मन अपने ही ग़ुस्से से अंधा हो कर गिर पड़े

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