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बंदर अब्बास की रातें — Mohsen Moussawi

दक्षिण का बुख़ार

गीत

बंदर अब्बास की रातें

Mohsen Moussawi

दक्षिण का बुख़ार एल्बम से

MIBL Radio पर Mohsen Moussawi का “बंदर अब्बास की रातें” सुनिए — मुफ़्त, बिना ऐप, तुरंत चालू।

टेम्पो
136 BPM

इसे 68 या 272 BPM भी पढ़ा जा सकता है — टेम्पो का दोगुना होना सामान्य है और दोनों सही हैं।

बोल

बंदर अब्बास की रातें, आशिक़ों का हंगामा!

गुलाब जल और उमस घर के चारों ओर लिपटती है!

अब बजा अपना ऊद, तेज़ और भागती ताल पर!

तेरी निगाह दिल ले जाती है, वे सुंदर मस्त आँखें!

यल्ला नाच ओ यार, मेरी बेक़रार ख़ुशी!

इस बंदरगाह की हवा में, तेरी हँसी के सिवा मेरा क्या है!

आ रात के साहिल पर, आख़िरी सितारे तक!

आशिक़ों की यह महफ़िल, काश कभी ख़त्म न हो!

सारे हाथ ऊपर उठे, दरबूका की चोट पर!

यह दिल हमारा क़ुर्बान, उन निगाहों की मिठास पर!

यल्ला नाच ओ यार, मेरी बेक़रार ख़ुशी!

इस बंदरगाह की हवा में, तेरी हँसी के सिवा मेरा क्या है!

बंदरगाह और चाँदनी साहिल, राह की कहानी का अंत

बजा दे ओ बेक़रार मस्त

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