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सलाम इस्फ़हान — Mohsen Moussawi

सलाम इस्फ़हान

गीत

सलाम इस्फ़हान

Mohsen Moussawi

सलाम इस्फ़हान एल्बम से

MIBL Radio पर Mohsen Moussawi का “सलाम इस्फ़हान” सुनिए — मुफ़्त, बिना ऐप, तुरंत चालू।

टेम्पो
145 BPM

इसे 73 या 290 BPM भी पढ़ा जा सकता है — टेम्पो का दोगुना होना सामान्य है और दोनों सही हैं।

बोल

सलाम इस्फ़हान, ऐ फ़ीरोज़े के शहर

मेरा दिल तेरे लिए जलता है, और बुरी तरह जलता है!

कहते हैं सूख गई, तेरी ज़िंदगी की वह रग

मगर उसका निशान अब भी तेरी मिट्टी पर है

सलाम इस्फ़हान, शाह अब्बास की रातें

बग्घी की आवाज़, चहारबाग़ और चमेली की ख़ुशबू

क़ैसरिया बाज़ार और रंगों से भरे क़ालीन

तेरे हर कोने में एक पूरी दुनिया भर की ख़ूबसूरती

सलाम इस्फ़हान, सलाम मेरे घर को!

तू ही मेरा इकलौता घर और इकलौता आशियाना है!

ख़ुदा करे मैं तुझ पर कभी ग़म न देखूँ

और तेरे क़दमों की धूल फिर से चूमूँ…!

सलाम इस्फ़हान, और उन तन्हा पुलों को

सी-ओ-से पोल और ख़्वाजू पुल, ख़ामोश और तन्हा

मगर हम आ रहे हैं, बादल और बारिश लेकर

हम उसे फिर बनाएँगे, वह रोशनियों का शहर

सलाम इस्फ़हान, तू मेरा आधा जहान है

इस थके दिल में, तू ही मेरी धड़कन है

क़सम काशी की, क़सम तेरे जुड़वाँ मेहराबों की

तेरा पानी तेरी नदी में फिर बहेगा!

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