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पुराने दिनों की याद — Mohsen Moussawi

पुराने दिनों की याद

गीत

पुराने दिनों की याद

Mohsen Moussawi

पुराने दिनों की याद एल्बम से

MIBL Radio पर Mohsen Moussawi का “पुराने दिनों की याद” सुनिए — मुफ़्त, बिना ऐप, तुरंत चालू।

टेम्पो
141 BPM

इसे 71 या 283 BPM भी पढ़ा जा सकता है — टेम्पो का दोगुना होना सामान्य है और दोनों सही हैं।

बोल

एक ज़माना था कि मेरे चारों तरफ़ भीड़ थी

और मेरा दिल इश्क़ और रोशनी से भरा था

अब मैं अकेला हो गया, बिलकुल अकेला

और यही सब मेरे हमदम बन गए

काश मेरे दिल में कोई एहसास ही न होता

इस बेकसी में कोई हिस्सा ही न होता

काश मेरा दिल दीवाना न होता

यादों के साथ एक ही घर में न रहता

काश मेरा दिल पत्थर का होता

इन तंग दिनों से ख़ाली होता

थक गया है मेरा दिल, जान बाक़ी नहीं

और मेरे इस दर्द का कोई इलाज नहीं

मेरी उम्र इस ग़म के क़दमों में बरबाद हुई

मेरी आँख बेकसी की रात में भीग गई

दुनिया मेरे लिए ठंडी है और काली है

इस दुनिया से मेरा हिस्सा एक आह है

आह, कितना भारी बैठा है यह दिल मेरा

इसकी धड़कनें एक-एक कर गिरती जा रही हैं

कितना दुखाती हैं, ये यादें

जैसे उनमें से हर एक मिट्टी हो

आह, कितना भारी बैठा है यह दिल मेरा

इसकी धड़कनें एक-एक कर गिरती जा रही हैं

कितना दुखाती हैं, ये यादें

जैसे उनमें से हर एक मिट्टी हो

मैं बूढ़ा हो गया और मेरा दिल टूट गया

ग़म की गर्द मुझ पर बैठ गई

पुराने दिनों की याद ने मुझे मार डाला

पुराने ज़ख़्म यहीं हैं, इस बंद मुट्ठी में

आह, कितना भारी बैठा है यह दिल मेरा

इसकी धड़कनें एक-एक कर गिरती जा रही हैं

कितना दुखाती हैं, ये यादें

जैसे उनमें से हर एक मिट्टी हो

आह, कितना भारी बैठा है यह दिल मेरा

इसकी धड़कनें एक-एक कर गिरती जा रही हैं

कितना दुखाती हैं, ये यादें

जैसे उनमें से हर एक मिट्टी हो

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