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शक का आईना — Mohsen Moussawi

शक का आईना

गीत

शक का आईना

Mohsen Moussawi

शक का आईना एल्बम से

MIBL Radio पर Mohsen Moussawi का “शक का आईना” सुनिए — मुफ़्त, बिना ऐप, तुरंत चालू।

टेम्पो
156 BPM
की
B minor 81% भरोसा
Camelot
10A

इसे 78 या 312 BPM भी पढ़ा जा सकता है — टेम्पो का दोगुना होना सामान्य है और दोनों सही हैं।

बोल

फिर वही किस्सा, फिर वही बेकार की बातें

हमारे बीच एक दीवार है, और वह कीने से बनी है

तेरी आँखों में फिर आँसू हैं, तेरे दिल में ग़म और कीना

तू कहती है मेरी जगह यहाँ नहीं, तू कहती है यही हमारी तक़दीर है

अपने दिल के आईने में इस शक़ के सिवा तुझे कुछ क्यों नहीं दिखता?

मैं तेरे पास हूँ, फिर भी जैसे तू मेरे पास बैठती ही नहीं

तू कहती है: उन्हें चाहती हूँ, और तुझे भुला दूँगी

मेरे दिल का बाग़ उसने इस-उस के हाथ कैसे सौंप दिया?

सुर्ख़ गुलाब की अपनी जगह है, चमेली की जगह और है

मेरी जान, यहाँ हर फूल अपना ही एक इश्क़ कहता है

अपने दिल के आईने में इस शक़ के सिवा तुझे कुछ क्यों नहीं दिखता?

मैं तेरे पास हूँ, फिर भी जैसे तू मेरे पास बैठती ही नहीं

जिस दिल को तूने ख़ुद बोया, उसकी जड़ पर कुल्हाड़ी नहीं उठाई जाती

और फिर कहा नहीं जाता कि यह इश्क़ बेक़ीमत था, कि मैंने कुछ महसूस ही न किया

यार वह है जो मरहम बने, न कि वह जो कारी ज़ख़्म बन जाए

वह जो इन उदास रातों में पनाह और तसल्ली बन जाए

अपने दिल के आईने में इस शक़ के सिवा तुझे कुछ क्यों नहीं दिखता?

मैं तेरे पास हूँ, फिर भी जैसे तू मेरे पास बैठती ही नहीं

मैं वही हमदम हूँ जिसने तेरे दर्द अपनी जान पर लिए

वह दूसरा नहीं, जिसकी जगह तेरी सोच में मैंने ख़ुद अपने हाथों काटी

आँख खोल और देख: मैं यहीं हूँ, तेरे पास

उम्र भर हम हमसफ़र रहे, इस राह पर जो तेरा ही वादा थी

अपने दिल के आईने में इस शक़ के सिवा तुझे कुछ क्यों नहीं दिखता?

मैं तेरे पास हूँ, फिर भी जैसे तू मेरे पास बैठती ही नहीं

देख — दर्द से भरे इस दिल में तेरी जगह हमेशा की है

तेरे सिवा किसी और इश्क़ से मैंने कभी सुलह नहीं की

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