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शीराज़ का दिलबर — Mohsen Moussawi

इश्क़ की रात

गीत

शीराज़ का दिलबर

Mohsen Moussawi

इश्क़ की रात एल्बम से

MIBL Radio पर Mohsen Moussawi का “शीराज़ का दिलबर” सुनिए — मुफ़्त, बिना ऐप, तुरंत चालू।

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इरम के बाग़ में, एक राज़ों भरी रात

तुम्हारे आने से इश्क़ ने फिर नई शुरुआत की

हाफ़िज़ की ग़ज़लें तुम्हारे लबों पर

साज़ के साथ फिर से ज़िंदा हो उठीं

ऐ शीराज़ी दिलबर, सिर से पाँव तक नाज़ ही नाज़

तुम्हारी नज़र से मेरे दिल ने उड़ान भर ली

आओ कि नारंगी के फूलों की बहार आ गई

मेरे लब तुम्हारे साथ हर रात गीत गाते हैं

हाफ़िज़ की मज़ार पर, मेरा हाथ तुम्हारे हाथ में

मेरा वजूद तुम्हारी आवाज़ का हमसुर हो गया

सेतार और संतूर तुम्हारे शौक़ में गा रहे हैं

दश्ती और खरे शाहनाज़ के सुरों में

ऐ शीराज़ी दिलबर, सिर से पाँव तक नाज़ ही नाज़

तुम्हारी नज़र से मेरे दिल ने उड़ान भर ली

आओ कि नारंगी के फूलों की बहार आ गई

मेरे लब तुम्हारे साथ हर रात गीत गाते हैं

रुक जाओ कि तुम्हारे बिना हमारी रात लंबी है

मेरे दिल के बाग़ का दरवाज़ा तुम्हारे लिए खुला है

ऐ शीराज़ी दिलबर, सिर से पाँव तक नाज़ ही नाज़

तुम्हारी नज़र से मेरे दिल ने उड़ान भर ली

आओ कि नारंगी के फूलों की बहार आ गई

मेरे लब तुम्हारे साथ हर रात गीत गाते हैं

ऐ शीराज़ी दिलबर...

सिर से पाँव तक नाज़...

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