MIBL RADIO
MIBL Tanin
होम

आख़िरी हिकायत — Mohsen Moussawi

आख़िरी हिकायत

गीत

आख़िरी हिकायत

Mohsen Moussawi

आख़िरी हिकायत एल्बम से

MIBL Radio पर Mohsen Moussawi का “आख़िरी हिकायत” सुनिए — मुफ़्त, बिना ऐप, तुरंत चालू।

टेम्पो
144 BPM
की
E minor 81% भरोसा
Camelot
9A

इसे 72 या 288 BPM भी पढ़ा जा सकता है — टेम्पो का दोगुना होना सामान्य है और दोनों सही हैं।

बोल

जवानी के उस बुख़ार और उस जोश का अब कोई निशान बाक़ी नहीं

सिर में उड़ने की उमंग... मगर न बाल है न पर

मेरा दिल अब नहीं तड़पता... उन सारे रंगों वाले इश्क़ों के लिए

न उन बेवजह की रूठनों के लिए... न हमारे उस जंगी हाल के लिए

हमारे बीच की यही ख़ामोशी... सबसे नायाब बातों से भरी है

यहाँ तेरे पास बैठना... जैसे किसी ख़्वाब को गुज़रते देखना हो

वह निगाह जो तेरे पास है... इस टूटे हुए आदमी के लिए

कहती है कि हमारा इश्क़ अब भी... घुटनों पर नहीं बैठा

हमारा इश्क़ अब हो गया है... एक मीठी आदत जैसा

न तूफ़ान न ओले... एक पुराना मौसम, खट्टा और मीठा

तेरी निगाह मेरे लिए पनाह है... उस पुराने घर जैसी जिसमें मैं बड़ा हुआ

तू वही है... वही साथी... बावक़ार, और अपना

तेरे और मेरे बाल, दोनों... अब बर्फ़ का निशान लेने लगे हैं

मगर हमारे दिल अब भी... एक-दूसरे पर मर मिटते हैं

अब कोई क़ौल-ओ-क़रार बाक़ी नहीं... कि कल हम पर क्या गुज़रेगी

यही लम्हा... अभी इसी वक़्त... मेरा दिल तेरे सिवा कुछ नहीं चाहता

तुझे कुछ कहने की ज़रूरत नहीं... मैं तेरी आँखों से पढ़ लेता हूँ

तेरे हर एक ग़म को... इसी एक निगाह से जान लेता हूँ

बस इतना कि तू यहाँ मेरे पास है... मेरी इस सर्द शाम में

तू मेरे दर्द की दवा है... तू मेरे दर्द के साथ चलने वाली है

मैं चाँद उतारना नहीं चाहता... आसमानों से तेरे लिए

मैं कोई क़िस्सा गढ़ना नहीं चाहता... सारी कहकशाओं के लिए

मैं बस यह चाहता हूँ कि तू यहाँ रहे... लकीर के आख़िर तक... इंतिहा तक

हमारे इन थके हुए दिनों में... तू ही आख़िरी हिकायत है

हमारा इश्क़ अब हो गया है... एक मीठी आदत जैसा

न तूफ़ान न ओले... एक पुराना मौसम, खट्टा और मीठा

तेरी निगाह मेरे लिए पनाह है... उस पुराने घर जैसी जिसमें मैं बड़ा हुआ

तू वही है... वही साथी... बावक़ार, और अपना

MIBL Nova
Melodies Inspired By Life
रेडियो पर बोलें
0:00 0:00
प्लेलिस्ट में जोड़ें