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नजफ़ाबाद की कहानी — Mohsen Moussawi

नजफ़ाबाद की कहानी

गीत

नजफ़ाबाद की कहानी

Mohsen Moussawi

नजफ़ाबाद की कहानी एल्बम से

MIBL Radio पर Mohsen Moussawi का “नजफ़ाबाद की कहानी” सुनिए — मुफ़्त, बिना ऐप, तुरंत चालू।

टेम्पो
154 BPM

इसे 77 या 308 BPM भी पढ़ा जा सकता है — टेम्पो का दोगुना होना सामान्य है और दोनों सही हैं।

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मेरा नजफ़ाबाद, ऐ पुराने ज़माने के शहर

भले दिल और मीठे लोगों की सरज़मीन

तुझे उसी दाना शेख़ ने बसाया

"बहाई" ने ऐसा ताक़तवर नक़्शा खींचा

इल्म और हिम्मत का निशान तेरी सरिश्त में है

ख़ुदा ने मुहब्बत से तुझे पानी और मिट्टी में लिखा

तू सिर्फ़ बाग़ों और सब्ज़ मैदानों का शहर नहीं

बल्कि हुनर, नक़्श और नक़्क़ाशी का गहवारा है

यही शहर एक जवाहर से भरा नगीना है

तेरी तहज़ीब की ख़ुशबू इस ज़माने में फैले

मीनार, क़िला, और वह "हफ़्त-बुर्ज-ए-ख़ारून"

तेरी शान के निशान, अपनी बुलंदी में खड़े

तेरे कबूतरख़ाने सर उठाए खड़े हैं

एक ऐसे हुनर के गवाह जिस पर बहस नहीं

मुनब्बत लकड़ी पर तेशे की आवाज़

ताने-बाने की धुन, और ग़ैरत का सबक़

तीसरे पहर का वक़्त, और रोटी-गेहूँ की महक

"एगेरदेक", मुस्कुराते मुँह पर वह मिठास

अंजीरी सीख का कबाब, और वह धुआँ

जिसका ज़ायक़ा हर मौजूद से ग़म ले जाता है

बहार के बादाम के फूल

तेरी बाग़ वाली गली में बेक़रार हो जाते हैं

अगरचे मैं तेरी उस पाक मिट्टी से दूर हूँ

मेरा दिल तेरी ज़मीन की गहराई की तरफ़ पर मारता है

तू हमेशा ज़िंदा है, याद में और जान में...

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