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रोटी और पानी — Mohsen Moussawi

रोटी और पानी

गीत

रोटी और पानी

Mohsen Moussawi

रोटी और पानी एल्बम से

MIBL Radio पर Mohsen Moussawi का “रोटी और पानी” सुनिए — मुफ़्त, बिना ऐप, तुरंत चालू।

टेम्पो
177 BPM

इसे 88 या 353 BPM भी पढ़ा जा सकता है — टेम्पो का दोगुना होना सामान्य है और दोनों सही हैं।

बोल

यह रात लोगों के ग़म से एक पूरे इतिहास जितनी लंबी हो गई

हर सीने की हर साँस एक ऐसी आह बन गई जिसमें चीख़ नहीं थी

दस्तरख़ान की रोटी आँसू हो गई, बच्चे की मुस्कान धुआँ हो गई

घर, बार-बार के डर से, चुपचाप हवा में उड़ गया

एक माँ ने शर्म से अपने आँसू अपनी चादर में सी लिए

ताकि उसका बच्चा कभी न जाने कि रात का हिस्सा ख़त्म हो गया

अपने बच्चों की आँखों के सामने वह मरा — और फिर भी मुस्कुराया

ऐ वतन, ऐ बाक़ी रह गए ज़ख़्म, ऐ तप में जलती साँस

तेरा दर्द सीने में रह गया और तेरा रोना चीख़ बन गया

ऐ वतन, ऐ लोगों की घुटी हुई सिसकी, ऐ बेपनाह आवाज़

तेरा नाम हमारी जान में दिल के दुख का जुड़वाँ बनकर जन्मा

ऐ ख़ुदा… ये लोग जिनके पीछे कोई नहीं, न पनाह, न आवाज़

कब तक जलते रहें? इनकी पूरी उम्र एक चीख़ बन गई!

काश एक सच्ची सुबह रात के दिल से फूट पड़े

और ख़बर लाए कि पुराना ग़म आख़िरकार आज़ाद हो गया…

ऐ वतन, ऐ बाक़ी रह गए ज़ख़्म, ऐ तप में जलती साँस

तेरा दर्द सीने में रह गया और तेरा रोना चीख़ बन गया

ऐ वतन, ऐ लोगों की घुटी हुई सिसकी, ऐ बेपनाह आवाज़

तेरा नाम हमारी जान में दिल के दुख का जुड़वाँ बनकर जन्मा…

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